
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
चोपन/सोनभद्र। नगर पंचायत चोपन कार्यालय से सटी और हाइडिल कॉलोनी की ओर जाने वाली मुख्य सड़क बदहाल हालात में है। रेलवे अंडरपास पुलिया से शुरू होकर यह मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। महज़ कुछ मीटर की दूरी पर स्थित नगर पंचायत कार्यालय के सामने ही सड़क की यह दुर्दशा नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। यह मार्ग कांसीराम शहरी आवास सहित दो वार्डों को जोड़ता है और हजारों की आबादी इसी रास्ते से गुजरती है। जर्जर सड़क पर बने गड्ढे जहां सरकार के गड्ढा मुक्त सड़क के दावों की पोल खोल रहे हैं, वहीं बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों के लिए यह रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट बन चुके हैं। सबसे अहम बात यह है कि इसी मार्ग से होकर 33/11 केवी पावर सब-स्टेशन और चोपन गांव की ओर भी रोज सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। पूरे नगर और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग बिजली संबंधी कार्यों के लिए इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में टूटी-फूटी सड़क का खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ता है।

हाइडिल कॉलोनी निवासी अमन मौर्य का कहना है कि इस क्षेत्र में कांसीराम शहरी आवास के अलावा दो वार्डों के सभासदों के भी आवास हैं। बावजूद इसके नगर पंचायत की उदासीनता के चलते आज तक सड़क और नाली की कोई समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। बरसात के दिनों में जलजमाव से समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कई जगह सजावटी काम और अपेक्षाकृत काम जरूरी योजनाएँ चल रही हैं, लेकिन जिन बुनियादी जरूरतों का हल निकाला जाना चाहिए, उन्हें नज़र अंदाज़ किया जा रहा है। सवाल यह भी है कि लगातार तीसरी पंचवर्षीय में जनता ने एक ही परिवार के हाथ में नगर पंचायत की बागडोर सौंपी है ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि जनप्रतिनिधि इन समस्याओं से अनजान कैसे हैं।
नगर में विकास के नाम पर काम तो हो रहे हैं, लेकिन जिन मुद्दों पर प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वही अब जनता के लिए मुसीबत बन गए हैं। टूटी सड़कों और नालियों की कुव्यवस्था से परेशान लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो विकास केवल कागजों और बोर्डों तक ही सीमित रह जाएगा।

