Last Updated:
मेरठ के किसान अगेती आलू की बुवाई से अच्छी कमाई का सपना तो देखते हैं, लेकिन बारिश, जलभराव और मिट्टी की गुणवत्ता जैसी चुनौतियां अक्सर उनके मुनाफे में रोड़ा बन जाती हैं. ऐसे में जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने क…और पढ़ें
जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार अगेती बुवाई अगस्त के अंतिम सप्ताह से सितंबर के पहले सप्ताह के बीच की जानी चाहिए. इस समय की गई बुवाई से किसान दीपावली से पहले नई आलू की फसल तैयार कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. उन्होंने सलाह दी कि बुवाई से पहले किसान अपने खेत की मिट्टी की जाँच अवश्य कराएं. मिट्टी परीक्षण से उर्वरक क्षमता, पोषक तत्व और अन्य जरूरी जानकारी मिलती है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हो पाता है.
अगस्त–सितंबर में बारिश अधिक होती है, जो आलू की फसल के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।. ऐसे में खेत का समतल होना और पानी निकासी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है. जलभराव की स्थिति में फसल को नुकसान और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है. किसान चाहें तो प्राकृतिक पद्धति अपनाकर फसलों में सीमित मात्रा में ही संबंधित स्प्रे का उपयोग करें.
गोबर की खाद सबसे बेहतर
अरुण कुमार के अनुसार, बाजार में मिलने वाले रासायनिक खाद की तुलना में गोबर की खाद आलू की फसल के लिए अधिक लाभकारी है. इससे उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है. उन्होंने कहा कि यदि किसान इन सभी बातों का पालन करते हुए वैज्ञानिक पद्धति और प्राकृतिक खेती अपनाएं, तो वे निश्चित रूप से अच्छी कमाई कर सकते हैं. बताते चलें कि मेरठ में बड़ी मात्रा में चिप्सोना सहित विभिन्न किस्मों के आलू की खेती होती है, जिसे देशभर में सप्लाई किया जाता है.


