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पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल बाघों की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को ब्रिटिशकालीन 15 ऐतिहासिक स्थल भी दिखाए जाते हैं. इनमें से अधिकतर स्पॉट्स सफारी रूट का हिस्सा हैं. इन स्थानों क…और पढ़ें
पीलीभीत टाइगर रिजर्व आने वाले सैलानियों को बाघों के दीदार और जंगल की सैर के साथ ही साथ 15 स्पॉट्स भी विजिट कराए जाते हैं. इनमे से अधिकांश ब्रिटिशकाल की ऐतिहासिक धरोहर हैं. वैसे तो यह सभी स्पॉट्स सफारी रूट का हिस्सा हैं. इनमें से एक टूरिस्ट स्पॉट ऐसा भी है जहां सैलानी पर्यटन सत्र की समाप्ति के बाद भी पहुंच सकते हैं. वहीं इसके लिए उन्हें महज 10 रुपए का ही शुल्क अदा करना होगा. इसे सप्त सरोवर के नाम से भी जाना जाता है. यहां सीढ़ीनुमा सात ताल बनाए गए हैं. जो कि किसी झरने जैसा नजर आते हैं. वहीं पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के घने जंगलों के बीचों-बीच स्थित होने के चलते यह अपने आप में बेहद ख़ूबसूरत भी नज़र आता है.
कैसे पहुंचे सप्त सरोवर
सप्त सरोवर का निर्माण ब्रिटिश काल में किया गया था. पर्यटकों में इसकी दीवानगी को देखते सप्त सरोवर को विकसित और संरक्षित करने की कवायद शुरू की गई थी. वन विभाग की ओर से यहां बनाई हट्स को हट्स को रोजगार की दृष्टि से गांव की समिति को सौंप दिया गया है. पर्यटक यहां पहुंचने के लिए बाईफर्केशन प्वाइंट से शारदा सागर डैम मार्ग पर खारजा नहर के पुल पर स्थित एंट्री गेट से अपने निजी वाहन से ही प्रवेश कर सकते हैं. इस टूरिस्ट स्पॉट की सैर के लिए सैलानियों को महज 10 रुपए का शुल्क अदा करना होगा.


