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Ground Report: लखीमपुर खीरी के तराई इलाके में शारदा नदी की कटान से कई किसानों की जमीन और मकान नदी में समा गए हैं. अब ये किसान खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. कर्ज वसूली को लेकर बैंक कर्मियों का दबाव बढ़ र…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में शारदा नदी की कटान से भारी तबाही है.
- कई किसानों की जमीन और मकान नदी में समा गए हैं.
- प्रभावित किसान अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.
“जमीन भी गई, घर भी गया, अब क्या दें बैंक को?”
गोलाटहसील के हजूरपुरवा गांव के रहने वाले किसान बाबूराम ने बताया कि उनके परिवार के पास कुल 11 एकड़ कृषि भूमि थी. लेकिन बीते महीनों में शारदा नदी की कटान ने सारी जमीन निगल ली. उन्होंने कहा कि हम तीन भाई हैं, सबकी खेती इसी ज़मीन पर थी. अब कुछ भी नहीं बचा. खेती के लिए बैंक से लोन लिया था, लेकिन अब ना जमीन है, ना पैसा.”
कटान से उजड़ गया गांव
हजूरपुरवा के ही एक और किसान छत्रपाल ने बताया कि पिछले साल बाढ़ के दौरान उनका मकान भी शारदा नदी में बह गया. इस साल कटान और तेज हुई है. उन्होंने कहा कि अब तो परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे जी रहे हैं. ज़मीन भी गई, घर भी गया. कोई मदद नहीं करता, बस सर्वे करके चले जाते हैं.
कोई नहीं मिल रहा स्थायी समाधान
तराई क्षेत्र के गांवों में हर साल बरसात के मौसम में यही हालात बनते हैं. कभी नदी का जलस्तर बढ़ने से खेत डूबते हैं, तो कभी कटान से जमीन खिसकती जाती है. ग्रामीण बताते हैं कि प्रशासन हर बार आश्वासन देता है, लेकिन न तो कटान रोकने के लिए तटबंध बनता है और न पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था होती है.


